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भारत-पाकिस्तान या बंटवारे का मतलब सिर्फ दधुरंधर या नफरत नही, इम्तियाज अली की फ़िल्म ……

जब किसी कहानी के ईमोशंस आपके दिल पर किसी प्रलय की तरह टूट पड़े और बचकर निकलने की भी कोई गुंजाइश नजर ना आए। जब इस बात का भी किसी तरह का कोई मतलब ना रह जाए कि आप अपनी भावनाओं को रोके रखने में कितने मजबूत व्यक्तित्व वाले व्यक्ति हैं। जब आपके दिल में इस तरह के इमोशंस भी उमड़ने लगे हैं जो आज तक आपने दबाये रखे थे तो इस बात को मन लीजिएगा कि आपका सामना एक ऐसी उम्दा लव स्टोरी से हुआ है जिसने आपकी रूह को बिना जान निकाले कुछ देर के लिए कब्ज कर लिया था और इम्तियाज अली की “मैं वापस आऊंगा” एक वही लव स्टोरी है।

कोई इंसान बंटवारे की कहानी को बिना नफरत के या लव स्टोरी के बीच किसी विलेन के न होने के बावजूद कैसे लिख सकता है? लेकिन इम्तियाज अली और नयनिका मेहतानी की राइटिंग को सलाम किया जाना चाहिए कि उन्होंने बंटवारे के दर्द को एक लव स्टोरी में ऐसा पिरोया है कि बिना एक्शन फिल्म के भी थिएटर में बैठे दर्शक अपनी कुर्सियों की पेटियां खोल नही पाए।

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